श्री मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ अजमेर रास्ता नशा मुक्ती मेला चमत्कार स्थान

मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ नशा छुड़वाने के लिए प्रसिद्ध है। यह धाम राजगढ़ अजमेर-ब्यावर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सरधना गावं से आठ किलोमीटर दुरी पर है। धार्मिक स्थलों में यह ऐसा अनूठा मंदिर है। जहां पर किसी भी रूप में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दान चंदा भेंट स्वीकार नहीं किया जाता है। इतना ही नहीं बल्कि यहां पर फूल माला अगरबत्ती प्रसाद आदि भी स्वीकार नहीं है। यहा प्रत्येक रविवार में भारी मात्रा में श्रद्धालु दर्शन करने आते है। सभी श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल, चाय और भोजन की भी निशुल्क व्यवस्था की जाती है।

मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ जाने का रास्ता

मसानिया-भैरू-धाम-राजगढ़

अजमेर से भैरव धाम राजगढ़ – अजमेर से 20 किलोमीटर दुरी पर है।

ब्यावर से मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ – ब्यावर से 40 किलोमीटर दुरी पर है।

NH 58 (New Name) से मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ – 8 किलोमीटर है।

धाम पर नहीं चढ़ता चढ़ावा, नहीं ग्रहण किया जाता प्रसाद

आपको बता दें कि यह धाम नशा छुड़वाने के लिए प्रसिद्ध है. यहां प्रसाद के रूप में भैरव बाबा की चिमटी दी जाती है. साथ ही मनोकामना पूर्ण स्तंभ की परिक्रमा करवाई जाती है. धाम पर ना तो किसी तरह का चढ़ावा या ना किसी तरह का प्रसाद ग्रहण किया जाता है. यहां मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री, पुलिस – प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सहित कई दिग्गज भी समय-समय पर हाजिरी लगाते रहते हैं।

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श्री मसाणिया भैरव धाम पर छठ पर लगता है मेला

यहां हर वर्ष नवरात्र की छठ पर धाम पर मेला लगता है। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। कोरोना के चलते पिछले तेरह महीने से धाम पर श्रद्धालुओं के आने पर मंदिर प्रबंध कमेटी की ओर से रोक लगाई गई है। यहा प्रत्येक रविवार में भारी मात्रा में  श्रद्धालु दर्शन करने आते है।

अजमेर के पास विख्यात मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ में मुख्य उपासक चंपालाल महाराज के सानिध्य में नवरात्रा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है।

सवाई भोज मन्दिर आसीन्द

भ्रूण हत्या को बताते हैं अभिशाप

मुख्य उपासक चंपालाल महाराज का सवाल है कि सभी को मां बहन पत्नी चाहिए तो बेटी क्यों नहीं चाहिए. बेटियां स्वयं अपना भाग्य लिखवा कर लाती है। यह किसी पर बोझ नहीं होती बल्कि परिवार की सेवा करने के लिए सदैव तत्पर रहती है. भ्रूण हत्या आप ही नहीं बल्कि अभिशाप भी है।

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भक्त से नहीं लेता है कोई भी दान

उन्होंने कहा कि भगवान लेता नहीं बल्कि देता है। मंदिर में चंदा फूलमाला अगरबत्ती प्रसाद आदि चढ़ाने के बजाय श्रद्धालु खाली आकर भगवान से मांगें तो भगवान निसंदेह श्रद्धालु की मनोकामना पूरी करते हैं। वास्तविकता में वही सच्चा मसाणिया भैरव धाम है। जहां पर किसी भी प्रकार का कोई भी चढ़ावा स्वीकार नहीं किया जाए। क्योंकि किसी भी कफन में जेब नहीं होती।

नहीं नजर आता कोई भी भिखारी

गौरतलब है कि इस विख्यात मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ पर विशेष धार्मिक आयोजन और मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमडने के बावजूद पूरे क्षेत्र में एक भी भीख मांगने वाला भिखारी नजर नहीं आता है। जबकि अधिकांश धार्मिक स्थलों के बाहर भीख मांगने वालों की कतार लगी रहती है। धार्मिक स्थलों पर सेवाएं देने वाले व्यक्ति भी विशेष रुप से अरदास कराने और कतार में नहीं लगने का विशेष सुविधा शुल्क वसूलते हैं।

मुख्य उपासक चंपालाल महाराज

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श्री मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ के मुख्य उपासक चंपालाल महाराज ने बताया कि जब वह 13 साल की उम्र के थे तभी से मसाणिया भैरव की उपासना करते हैं। उस वक्त प्रण लिया गया था। किसी भी श्रद्धालु से किसी भी रूप में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुछ भी भेंट स्वीकार नहीं की जाएगी। स्वयं की हैसियत के अनुसार हर संभव श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए इस धाम पर आस्था को देखते हुए लाखों लोगों का आगमन होता है। जिन्हें कुरीतियों से दूर रहने के बारे में भी जागृत करने का प्रयास किया जाता है।

उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि इंसान के पास जो कुछ है। वह भगवान का दिया हुआ है। इसलिए उसी को वापस देना सैद्धांतिक रूप से गलत है। भगवान लेता नहीं बल्कि देता है। सामाजिक सरोकार रक्तदान, जल स्वावलंबन, नशा मुक्ति, वृक्षारोपण सहित भ्रूण हत्या रोकने और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की मुहिम चलाकर इस मुहिम मे शामिल होकर मानवता का दायित्व अदा करें।

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